Skip to content

प्रश्न 1: सफेद मोतिया क्या है?

होने लगता है, ठीक वैसे ही जैसे उम्र बड़ी होने पर बाल सफेद हो जाते हैं। सफेद लेंस को मोतिया कहते हैं।

प्रश्न 2: सफेद मोतिया क्यों होता है?

उत्तर: कई कारण है परन्तु सबसे अहम् कारण उम्र का बढ़ना है। केवल इतना है कि किसी को मोतिया 60-65 में होने लगता है और किसी को 50-55 में ही।

यदि मधुमेह का रोग है तो मोतिया अधिक तीव्रता से बढ़ने लगता है। कुछ दवाइयाँ जैसे पेरीमोन, वेटनीसोल इत्यादि मोतिया कर देती हैं, इसलिये बिना डाक्टर की आज्ञा के इन्हें लेना ठीक नहीं है।

प्रश्न 3: मोतिया के आपरेशन का सही समय कब है?

उत्तर: मोतिया का आपरेशन तब करवाये जब आप को लगे कि दृष्टि इतनी कम हो गयी है कि अखबार नहीं पढ़ा जा सकता या आपको अपने काम करोबार में कठिनाई होने लगे। मोतिये के पकने का इन्तजार न करें।

प्रश्न 4: किस मौसम में आपरेशन करवाना चाहिये?

उत्तर: प्रत्येक मौसम आपरेशन के लिये अनुकूल है। गर्मी, सर्दी, वर्षा इत्यादि से आपरेशन की सफलता पर कोई असर नहीं पड़ता है। पुरानी परम्परा चली आ रही है कि सर्दी का मौसम सबसे अनुकूल है, ऐसा सोचना गलत है।

प्रश्न 5: क्या आपरेशन के लिये भर्ती होना पड़ेगा?

उत्तर: नयी तकनीक से किये जा रहे आपरेशन में भर्ती आवश्यक नहीं है। आपरेशन 20-40 मिनट में समाप्त हो जाता है, इसके पश्चात आप घर जा सकते हैं, या रात भर के लिए रूक सकते हैं। अगले दिन दिखाने आना पड़ेगा।

प्रश्न 6: क्या आपरेशन घर पर कराना ठीक है?

उत्तर: आपरेशन अपने घर पर कराना ठीक नहीं है। जो सुविधायें अस्पताल में मिलती हैं, वे घर पर नहीं मिल सकतीं। घर पर कमरा स्टरलाईज करने की भी सुविधा नहीं होती इसलिये ऑंख में मवाद पड़ने की सम्भावना अधिक होती हैं। आपरेशन दूरबीन की सहायता से किया जाता है, घर पर दूरबीन नहीं लायी जा सकती।

प्रश्न 7: आधुनिक आपरेशन प्रणाली को विशेषता क्या है?

उत्तर: आपरेशन दूरबीन से किया जाता है जिसमें सर्जन को ऑंख 10 गुनी बड़ी दिखती है और बहुत बारीकी से कार्य किया जाता है। जख्म को अत्यन्त बारीक टांकों से रफू कर दिया जाता है। मोतिये के स्थान पर ऑंख के अन्दर कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है जिससे बाद में रोगी की नजर सामान्य जैसी हो जाती है। यह लेंस बाहर से दिखता नहीं इसलिये पता ही नहीं चलता कि ऑंख में आपरेशन हो चुका है। ऑंख को खुजलाने से लेंस में कोई खराबी नहीं आ सकती। लेंस जिन्दगी भर चलता है, बीच में बदलना नहीं पड़ता।

प्रश्न 8: साधारण मोतिये के आपरेशन में नजर में क्या खामियां रहती हैं?

उत्तर : ऑंख बगैर चश्में के कुछ भी नहीं देख सकती। नजर तभी आता है जब भारी 10 नम्बर का चश्मा पहनें। इस मोटे लेंस के चश्मे से हर वस्तु 33 प्रतिशत बड़ी नजर आती है। सड़क या मैदान टेढ़े नजर आते हैं। सीढ़ी से उतरते समय पैड़ी नजर नहीं आती। नजर का दायरा बहुत कम चौड़ा रहता है इसलिये साइड पर खड़े लोग नहीं दिखते। यदि दूसरी ऑंख की नजर लगभग सामान्य है तो 10 नम्बर का चश्मा पहनने से एक को दो दिखने लगता है।

प्रश्न 9: कृत्रिम लेंस लगवाने से क्या फायदा है?

उत्तर: यदि ऑंख में लेंस लगवा लिया जाये तो आपकी नजर सामान्य जैसी हो जायेगी। बिना चश्मे आपकी 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक नजर रहेगी। केवल बारीक अक्षर पढ़ने अथवा अधिक दूर देखने के लिये हल्के नम्बर का चश्मा पहनना पड़ेगा। यदि लेंस वाले आपरेशन की तुलना साधारण आपरेशन से की जाये तो लेंस वाले आपरेशन में कम से कम 10 गुनी बेहतर नजर होगी।

प्रश्न 10: आपरेशन के बाद दृष्टि कब तक सामान्य हो जाती है?

उत्तर: दृष्टि तो अगले दिन ही आ जाती है परन्तु सामान्य होते-होते करीब 10-15 दिन लग जाते हैं। यह इस पर निर्भर है कि किस प्रकार का आपरेशन करवाया गया है।

प्रश्न 11: आपरेशन के बाद क्या प्रतिबन्ध होते हैं?

उत्तर: कोई विशेष प्रतिबन्ध नहीं होता। आप उठ-बैठ सकते है, चल फिर सकते हैं टी.वी. देख सकते हैं। भोजन वहीं करें जो हर दिन करते हैं। केवल भारी वजन न उठायें, सजदा न करें एवं ऑंख को चोट से बचायें।

प्रश्न 12: क्या आपरेशन लेसर-किरणों से हो सकता है?

उत्तर : मोतिया लेसर-किरणों से हटाया नहीं जा सकता। हाँ, 30-35 प्रतिशत रोगियों में आपरेशन के कुछ महीनों या सालों बाद कुदरती झिल्ली बन जाती है जिसे याग लेसर किरणों से कुछ ही क्षणों में हटा दिया जाता है। यह लेसर मशीन इस अस्पताल में उपलब्ध है।

प्रश्न 13: फेको प्रणाली क्या है? (टांको रहित मोतिये का आपरेशन)

उत्तर: यह विश्व की सबसे आधुनिकतम, मोतियाबिन्द आपरेशन करने की प्रणाली है। इस विधि में मात्र 3 मिमी. के सुराख से मशीन द्वारा मोतिये बिन्द को घुलाकर साफ कर दिया जाता है। बारीक सुराख के जरिये कृत्रिम लेंस भी डाल दिया जाता है। सुराख की विशेषता यह है कि वह बिना टांके स्वयं सील हो जाता है। रोगी को लाभ यह है कि अगले दिन से ही रोशनी लगभग 90 प्रतिशत आ जाती है, बारीक जख्म होने की वजह से जख्म की ताकत बेहतर होती है, टांको की रड़क नहीं होती एवं सामान्य जीवन 5-7 दिन में प्रारम्भ हो जाता है। यह आपरेशन भी इस अस्पताल में उपलब्ध है। बाहर के देशों में यही आपरेशन अधिक किया जाता है। परन्तु यह आपरेशन पूर्ण रूप से पके हुए मोतिया बिन्द में करना कठिन होता है। पिछले कुछ सालों से यही आपरेशन अत्याधिक लोकप्रिय हो चुका है। कारण यह है कि मरीज को कम से कम परेशानी होती है। वह तुरन्त घर जा सकता है तथा अपनी सामान्य दिनचर्या 1-2 दिन के बाद से आरम्भ कर सकता है। इस अस्पताल में मोतियाबिन्द के लगभग 95 प्रतिशत आपरेशन इसी विधि से किये जा रहे हैं अब तो तकनीक तथा मशीनों के विकास के कारण यह आपरेशन लगभग हर प्रकार के मोतियाबिन्द में सभव है। और जानकारी के लिए डॉ. साहब से पूछें।

टिप्पणियों तथा प्रश्नों के लिये यहाँ क्लिक करें